'हजार दीनारी' के नाम से भी जाने जाने वाले मलिक काफूर को किसने खरीदा था?
- Aअलाउद्दीन खिलजी
- Bगियासुद्दीन तुगलक
- Cनुसरत खां
- Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
उत्तर और व्याख्या देखें
सही उत्तर: (c) नुसरत खां
व्याख्या
प्रसिद्ध इतिहासकार के.एस. लाल की प्रसिद्ध पुस्तक 'हिस्ट्री ऑफ द खलजीज' के अनुसार, लगभग 1299 ई. में अलाउद्दीन खिलजी के गुजरात अभियान के दौरान सेनापति नुसरत खां ने समृद्ध बंदरगाह कैम्बे (खंभात) पर आक्रमण किया और बड़ी मात्रा में सोना, चांदी, रत्न तथा अन्य कीमती वस्तुएं प्राप्त कीं। इसी अभियान में दास मलिक काफूर पकड़ा गया। इसी समय नुसरत खां ने मलिक काफूर को उसके स्वामी से छीन लिया। चूंकि मलिक काफूर के स्वामी ने उसे एक हजार दीनार में खरीदा था, इसलिए उसे 'हजार-दीनारी' कहा जाने लगा। लूट के माल के साथ नुसरत खां ने मलिक काफूर को भी दिल्ली में अलाउद्दीन के पास भेजा। बाद में काफूर की असाधारण प्रतिभा और व्यक्तित्व से प्रभावित होकर सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी ने उसे अपना सबसे विश्वस्त सेनापति बनाया। अलाउद्दीन के दक्कन अभियानों और विजयों का श्रेय मुख्यतः मलिक काफूर को दिया जाता है। इस विवरण से स्पष्ट है कि नुसरत खां ने मलिक काफूर को खरीदा नहीं था, बल्कि गुजरात अभियान के दौरान उसे पकड़ा था। अतः निकटतम उत्तर विकल्प (c) है।