प्रत्यावर्ती धारा (AC) परिपथ में धारा और वोल्टता के बीच कला-संबंध परिपथ के अवयवों पर निर्भर करता है। स्तंभ I की प्रविष्टियों का स्तंभ II के उपयुक्त संबंधों से मिलान कीजिए:
| स्तंभ I (परिपथ का प्रकार) | स्तंभ II (धारा और वोल्टता के बीच कला-संबंध) |
|---|---|
| i. शुद्ध प्रतिरोध (R) | p. धारा वोल्टता से 90° आगे रहती है |
| ii. शुद्ध धारिता (C) | q. धारा और वोल्टता समान कला में होती हैं |
| iii. शुद्ध प्रेरकत्व (L) | r. धारा और वोल्टता समान कला में हो भी सकती हैं और नहीं भी |
| iv. R–L–C श्रेणी परिपथ | s. धारा वोल्टता से 90° पीछे रहती है |
सही मिलान वाला विकल्प चुनिए:
- Ai-p, ii-s, iii-q, iv-r
- Bi-q, ii-p, iii-s, iv-r
- Ci-q, ii-s, iii-p, iv-r
- Di-s, ii-r, iii-p, iv-q
उत्तर और व्याख्या देखें
सही उत्तर: (b) i-q, ii-p, iii-s, iv-r
व्याख्या
AC परिपथ में:
- शुद्ध प्रतिरोध: धारा और वोल्टता समान कला में होती हैं (i–q)।
- शुद्ध धारिता: धारा वोल्टता से 90° आगे रहती है (ii–p)।
- शुद्ध प्रेरकत्व: धारा वोल्टता से 90° पीछे रहती है (iii–s)।
- R–L–C श्रेणी परिपथ: कलांतर R, L और C के मानों पर निर्भर करता है, अतः धारा और वोल्टता समान कला में हो भी सकती हैं और नहीं भी (iv–r)। अनुनाद पर वे समान कला में होती हैं।
अतः कूट i-q, ii-p, iii-s, iv-r है।