आधुनिक इतिहास PYQ 206 / 636 · भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

1918 में मोंटफोर्ड सुधारों पर कांग्रेस ने आलोचनात्मक रुख अपनाया, जिससे पुराने नरमपंथी (सप्रू, जयकर और चिंतामणि) अलग हो गए, जिन्होंने गठन किया:

  1. Aइंडियन नेशनल लिबरल फेडरेशन का
  2. Bसर्वेंट्स ऑफ इंडिया सोसाइटी का
  3. Cस्वराज पार्टी का
  4. Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
  5. Eउपर्युक्त में से कोई नहीं

68th B.P.S.C. (Pre) 2022

उत्तर और व्याख्या देखें

सही उत्तर: (a) इंडियन नेशनल लिबरल फेडरेशन का

व्याख्या

अगस्त, 1917 में भारत के राज्य सचिव एडविन मांटेग्यू ने ब्रिटिश संसद में एक ऐतिहासिक वक्तव्य दिया, जिसे मांटेग्यू घोषणा (अगस्त घोषणा) कहा जाता है। इसमें प्रशासन और भारत में स्वशासी संस्थाओं के विकास में भारतीयों की भागीदारी बढ़ाने का प्रस्ताव था। इन सुधारों का स्वरूप तय करने के लिए मांटेग्यू ने तत्कालीन वायसराय लॉर्ड चेम्सफोर्ड के साथ मिलकर 'भारत में संवैधानिक सुधार' शीर्षक से एक विस्तृत रिपोर्ट निकाली, जिसे मोंटफोर्ड रिपोर्ट या मांटेग्यू-चेम्सफोर्ड रिपोर्ट कहा जाता है। यह रिपोर्ट 1918 ई. में प्रकाशित हुई। इस रिपोर्ट को लेकर कांग्रेस के भीतर उदारवादी और उग्रवादी गुटों के मतभेद स्पष्ट हो गए। परिणामस्वरूप मोंटफोर्ड रिपोर्ट के समर्थक उदारवादी 1918 ई. में कांग्रेस से अलग हो गए और सुरेंद्रनाथ बनर्जी के नेतृत्व में 1919 ई. में 'इंडियन नेशनल लिबरल फेडरेशन' नामक नया दल बनाया।

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