आधुनिक इतिहास PYQ 88 / 636 · अन्य जन विद्रोह

नील किसानों की दुर्दशा पर लिखी गई पुस्तक 'नील दर्पण' के लेखक कौन हैं?

  1. Aबंकिम चंद्र चटर्जी
  2. Bदीनबंधु मित्र
  3. Cशरत चंद्र चटर्जी
  4. Dरवींद्रनाथ टैगोर

42nd B.P.S.C. (Pre) 1997-98

उत्तर और व्याख्या देखें

सही उत्तर: (b) दीनबंधु मित्र

व्याख्या

नील विद्रोह बंगाल के नदिया जिले के गोविंदपुर गांव से शुरू हुआ। एक नील बागान मालिक के दो पूर्व कर्मचारियों, दिगंबर विश्वास और विष्णु विश्वास (विष्णुचरण विश्वास), के नेतृत्व में वहां के किसान एकजुट हुए और उन्होंने नील की खेती बंद कर दी। मांगों की दृष्टि से नील आंदोलनों के इतिहास में यह सबसे व्यापक और जुझारू विद्रोह था। बंगाल का नील विद्रोह शोषण के विरुद्ध किसानों का सीधा संघर्ष था। बंगाल के जो काश्तकार अपने खेतों में धान उगाना चाहते थे, उन्हें यूरोपीय नील बागान मालिक नील की खेती के लिए मजबूर करते थे। नील की खेती से इनकार करने वाले किसानों को बागान मालिकों के दमन-चक्र का सामना करना पड़ता था। मार्च, 1859 में बंगाल के हजारों रैयतों ने नील की खेती से इनकार कर दिया। विद्रोह फैलने के साथ रैयतों ने बागान मालिकों को लगान देने से भी इनकार कर दिया। 1860 ई. तक नील आंदोलन नदिया, पाबना, खुलना, ढाका, मालदा, दीनाजपुर आदि क्षेत्रों में फैल गया। किसानों की एकजुटता के कारण 1860 ई. तक बंगाल के लगभग सभी नील कारखाने बंद हो गए। बंगाल के बुद्धिजीवी वर्ग ने अखबारों में लेखों और जनसभाओं के माध्यम से इस विद्रोह का समर्थन किया। इसमें 'हिंदू पैट्रियट' के संपादक हरिश्चंद्र मुखर्जी की विशेष भूमिका रही। नील बागान मालिकों के अत्याचारों का सजीव चित्रण दीनबंधु मित्र ने अपने नाटक 'नील दर्पण' में किया।

यह प्रश्न हल करेंसभी 636 आधुनिक इतिहास PYQ