'जब उसने राजत्व प्राप्त किया, तो वह शरीयत के नियमों और आदेशों से पूर्णतया स्वतंत्र था।' बरनी ने यह कथन किस सुल्तान के लिए कहा?
- Aइल्तुतमिश
- Bबलबन
- Cअलाउद्दीन खिलजी
- Dमुहम्मद तुगलक
उत्तर और व्याख्या देखें
सही उत्तर: (c) अलाउद्दीन खिलजी
व्याख्या
जियाउद्दीन बरनी ने उपर्युक्त कथन अलाउद्दीन खिलजी के लिए कहा। अलाउद्दीन दिल्ली का पहला सुल्तान था, जिसने धर्म पर राज्य का नियंत्रण स्थापित किया। इस संदर्भ में अपनी नीति समझाते हुए उसने स्वयं कहा, 'मैं नहीं जानता कि कानून की दृष्टि से क्या उचित है और क्या अनुचित। राज्य की भलाई या किसी विशेष अवसर के लिए जो मुझे उपयुक्त लगता है, उसी का आदेश देता हूं। कयामत के दिन मेरा क्या होगा, मैं नहीं जानता।' अलाउद्दीन ने राजत्व के विषय में बलबन के विचार को फिर से जीवित किया। वह राजा की संप्रभु सत्ता में विश्वास करता था, जो पृथ्वी पर ईश्वर का प्रतिनिधि मात्र है। उसने अपनी शक्ति बढ़ाने के लिए खलीफा की अनुमति लेना आवश्यक नहीं समझा; इसलिए उसने अपने पद की मान्यता के लिए खलीफा से कोई याचना नहीं की। उसने स्वयं को 'यामिन-उल-खिलाफत नासिर अमीर-उल-मोमिनीन' बताया। इस प्रकार अलाउद्दीन दिल्ली का पहला सुल्तान था, जिसने धर्म को राजनीति में हस्तक्षेप नहीं करने दिया। अलाउद्दीन उलेमा के प्रभाव से मुक्त रहा।