निम्नलिखित में से किन वर्गों ने 1857 के विद्रोह में भाग नहीं लिया?
- 1. खेतिहर मजदूर
- 2. साहूकार
- 3. किसान
- 4. जमींदार
नीचे दिए गए कूट से अपना उत्तर चुनिए:
- Aकेवल 1
- B1 और 2
- Cकेवल 2
- D2 और 4
उत्तर और व्याख्या देखें
सही उत्तर: (d) 2 और 4
व्याख्या
1857 का विद्रोह बहुत बड़े क्षेत्र में फैला और उसे व्यापक जन-समर्थन मिला। फिर भी वह पूरे देश या भारतीय समाज के सभी वर्गों को अपनी चपेट में नहीं ले सका। यह दक्षिण भारत और पूर्वी तथा पश्चिमी भारत के अधिकांश भागों में नहीं फैला। अधिकांश देशी रियासतों के शासक और बड़े जमींदार स्वार्थी थे और अंग्रेजों की शक्ति से भयभीत होकर विद्रोह में शामिल नहीं हुए। इसके विपरीत ग्वालियर के सिंधिया, इंदौर के होल्कर, हैदराबाद के निजाम, जोधपुर के महाराजा, पटियाला, नाभा और जींद के सिख शासक, पंजाब के अन्य सिख सरदार, कश्मीर के महाराजा तथा कई अन्य सरदारों और बड़े जमींदारों ने विद्रोह को कुचलने में अंग्रेजों की सक्रिय सहायता की। गवर्नर जनरल कैनिंग ने बाद में कहा कि इन शासकों ने 'तूफान के आगे बांध का काम किया, अन्यथा यह तूफान हमें एक ही लहर में बहा ले जाता।' व्यापारियों और शिक्षित वर्ग ने कलकत्ता और बंबई में सभाएं करके अंग्रेजों की सहायता की अपील की। उच्च और मध्य वर्ग के अधिकांश लोग विद्रोहियों के आलोचक थे। विद्रोह में शामिल अवध के कई तालुकदारों (बड़े जमींदारों) ने अपनी जागीरें लौटाने का आश्वासन मिलने पर विद्रोह से किनारा कर लिया। ग्रामीण हमलों का मुख्य निशाना साहूकार थे, इसलिए वे स्वाभाविक रूप से विद्रोह के शत्रु बन गए। आधुनिक शिक्षा पाए भारतीयों ने भी विद्रोह का साथ नहीं दिया; वे देश का पिछड़ापन दूर करना चाहते थे और उन्हें यह गलत विश्वास था कि अंग्रेज आधुनिकीकरण के इन कामों में उनकी सहायता करेंगे।