निम्नलिखित में से किस वायसराय के काल में भारतीयों को 'राय बहादुर' और 'खान बहादुर' की उपाधियां दी जाने लगीं?
- Aलॉर्ड रिपन
- Bलॉर्ड लिटन
- Cलॉर्ड मेयो
- Dलॉर्ड डफरिन
- Eउपर्युक्त में से कोई नहीं/उपर्युक्त में से एक से अधिक
उत्तर और व्याख्या देखें
सही उत्तर: (e) उपर्युक्त में से कोई नहीं/उपर्युक्त में से एक से अधिक
व्याख्या
1857 के विद्रोह के बाद अंग्रेजों ने अपनी सहायता करने वाले देशी शासकों, जमींदारों आदि का विश्वास जीतने के लिए उन्हें उपाधियां, खिलअत, भूमि अनुदान, ऋण माफी आदि सुविधाएं दीं। हिंदुओं के लिए मुख्य उपाधि ‘राय बहादुर’ थी, और मुसलमानों तथा पारसियों के लिए इसकी समकक्ष उपाधि ‘खान बहादुर’ थी।
ये उपाधियां दिए जाने के प्रमाण 1859-1860 ई. से, लॉर्ड कैनिंग के समय से, मिलते हैं। यह विकल्पों में दिए गए चारों वायसरायों से पहले का समय है: लॉर्ड मेयो (1869-1872), लॉर्ड लिटन (1876-1880), लॉर्ड रिपन (1880-1884) और लॉर्ड डफरिन (1884-1888)। अतः इनमें से किसी ने यह प्रथा आरंभ नहीं की, और आयोग की उत्तर-कुंजी (e) है।