आधुनिक इतिहास PYQ 126 / 709 · अन्य जन विद्रोह

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

कथन I: पोलिगारों का विद्रोह दक्षिण भारत में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध सबसे प्रारंभिक विद्रोहों में से एक था, जिसका कारण पोलिगारों पर लगाई गई भारी भू-राजस्व माँगें थीं।

कथन II: पोलिगार परंपरागत रूप से अपने नियंत्रण वाले क्षेत्रों में भू-राजस्व वसूलते थे, और अंग्रेज़ों ने सीधे राजस्व वसूल कर उनके इस अधिकार को कमज़ोर करने का प्रयास किया।

उपर्युक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा सही है?

  1. Aकथन I और कथन II दोनों सही हैं, और कथन II, कथन I की सही व्याख्या है
  2. Bकथन I और कथन II दोनों सही हैं, किंतु कथन II, कथन I की सही व्याख्या नहीं है
  3. Cकथन I गलत है, किंतु कथन II सही है
  4. Dकथन I सही है, किंतु कथन II गलत है

B.P.S.C. AEDO 2026

उत्तर और व्याख्या देखें

सही उत्तर: (a) कथन I और कथन II दोनों सही हैं, और कथन II, कथन I की सही व्याख्या है

व्याख्या

दोनों कथन सही हैं, और कथन II, कथन I की व्याख्या करता है।

तमिलनाडु के तिरुनेलवेली–मदुरै क्षेत्र के स्थानीय सरदार पोलिगार (पालयक्कारर) अपने क्षेत्रों में भू-राजस्व वसूलते थे और सशस्त्र लोग रखते थे। जब अंग्रेज़ों ने सीधे राजस्व वसूलने और उन्हें निःशस्त्र करने का प्रयास किया, तो वे पोलिगार युद्धों (1799–1805) में उठ खड़े हुए, जो दक्षिण में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध सबसे प्रारंभिक विद्रोहों में से एक था। वीरपांड्य कट्टबोम्मन और मरुदु बंधुओं ने उनका नेतृत्व किया।

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