ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने, जो आरंभ में एक व्यापारिक संस्था थी, धीरे-धीरे विभिन्न तरीकों से भारतीय क्षेत्रों पर नियंत्रण प्राप्त किया। नीचे दी गई नीति लॉर्ड डलहौज़ी ने लागू की और इससे भारतीय शासकों में व्यापक असंतोष फैला।
अभिकथन (A): व्यपगत का सिद्धांत ब्रिटिश क्षेत्र के विस्तार के लिए लागू किया गया।
कारण (R): इसने अंग्रेज़ों को उन राज्यों को मिलाने दिया जिनका कोई प्रत्यक्ष पुरुष उत्तराधिकारी नहीं था।
सही विकल्प चुनिए:
- A(A) और (R) दोनों सत्य हैं, और (R), (A) की सही व्याख्या है
- B(A) और (R) दोनों सत्य हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
- C(A) असत्य है, किंतु (R) सत्य है
- D(A) सत्य है, किंतु (R) असत्य है
उत्तर और व्याख्या देखें
सही उत्तर: (a) (A) और (R) दोनों सत्य हैं, और (R), (A) की सही व्याख्या है
व्याख्या
दोनों सत्य हैं, और (R), (A) की व्याख्या करता है।
लॉर्ड डलहौज़ी (1848–1856) द्वारा लागू व्यपगत के सिद्धांत के अंतर्गत जिस आश्रित राज्य का शासक स्वाभाविक पुरुष उत्तराधिकारी के बिना मर जाता, वह कंपनी के पास चला जाता ("व्यपगत" हो जाता); दत्तक पुत्र उत्तराधिकारी नहीं हो सकता था। इस प्रकार डलहौज़ी ने बिना युद्ध के सतारा (1848), जैतपुर और संबलपुर (1849), बघाट (1850), उदयपुर (1852), झाँसी (1853) और नागपुर (1854) को मिला लिया।
इस नीति ने झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई जैसे भारतीय शासकों को क्रुद्ध किया और यह 1857 के विद्रोह के कारणों में से एक थी।