ऋग्वेद में निम्नलिखित में से किस देवता को 'ऋतस्य गोपा' कहा गया है?
- Aवरुण
- Bमरुत
- Cइंद्र
- Dअग्नि
उत्तर और व्याख्या देखें
सही उत्तर (इनमें से कोई भी): (a) वरुण या (d) अग्नि
व्याख्या
ऋग्वेद में वरुण ऋत का रक्षक है: वह ब्रह्मांडीय और नैतिक व्यवस्था जिसके अनुसार सूर्य उदय होता है, ऋतुएँ एक के बाद एक आती हैं और लोग सत्य बोलते हैं। अतः उसे ऋतस्य गोपा, "ऋत का रक्षक", कहा जाता है। वरुण लोगों के आचरण पर दृष्टि रखता है और गलत कार्य करने वालों को दंड देता है। उत्तर वैदिक काल में वह जल का देवता बन गया, और ऋत की धारणा आगे चलकर धर्म की धारणा बनी।
- वर्षा और युद्ध के देवता इंद्र, जिन्होंने वृत्र का वध किया, के सबसे अधिक सूक्त हैं।
- अग्नि, आग के देवता, आहुतियाँ देवताओं तक पहुँचाते हैं।
- मरुत आँधी-तूफ़ान के देवता हैं, इंद्र के साथी।
The book's key is (a), Varuna, the god most closely linked with rita. The first hymn of the Rigveda (1.1.8) also calls Agni 'gopam ritasya', so (d) is also accepted.