प्राचीन भारतीय प्रशासन में 'भांडागारिक' की भूमिका के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?
- Aवे सैन्य प्रशिक्षण के लिए उत्तरदायी अधिकारी थे।
- Bवे श्रेणियों (गिल्डों) के लेन-देन और परंपराओं का अभिलेख रखते थे, जैसा कि निग्रोध जातक में उल्लेख है।
- Cवे राजकीय कोष और सिक्कों की ढलाई का प्रबंधन करते थे।
- Dवे मौर्य साम्राज्य में मुख्य कर-संग्राहक थे।
उत्तर और व्याख्या देखें
सही उत्तर (इनमें से कोई भी): (b) वे श्रेणियों (गिल्डों) के लेन-देन और परंपराओं का अभिलेख रखते थे, जैसा कि निग्रोध जातक में उल्लेख है। या (c) वे राजकीय कोष और सिक्कों की ढलाई का प्रबंधन करते थे।
व्याख्या
भांडागारिक का अर्थ है भांडागार, अर्थात राजकीय भंडार और कोष, का रक्षक। बौद्ध ग्रंथों में वह राजा का कोषाध्यक्ष है, जो राजकीय धन और बहुमूल्य वस्तुओं का, कोष में रखे सिक्कों सहित, प्रभारी था।
निग्रोध जातक में जब राजा अपने मित्र पोट्टिक को कोषाध्यक्ष बनाता है, तो इस पद के साथ सभी व्यापारी श्रेणियों के न्यायाधीश का दायित्व भी मिलता है, जो एक नया पद था। अतः भांडागारिक श्रेणियों के मामलों और परंपराओं को भी देखता था।
मौर्यों के समय मुख्य राजस्व-संग्राहक समाहर्ता और कोष का रक्षक सन्निधाता था। सैन्य प्रशिक्षण और कर-संग्रह भांडागारिक के कार्य नहीं थे।
The book's key is (c): the bhandagarika was the royal treasurer. In the Nigrodha Jataka the treasurer was also the judge of all the merchant guilds, so (b) is also accepted.