हड़प्पावासियों की शवाधान प्रथाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. हड़प्पावासी तीन प्रकार के शवाधान करते थे: पूर्ण शवाधान, आंशिक शवाधान और दाह-संस्कार के बाद शवाधान।
- 2. वे मृतकों को उत्तर–दक्षिण दिशा में रखते थे, प्रायः मृद्भांडों और औज़ारों जैसी वस्तुओं के साथ।
- 3. लोथल जैसे हड़प्पाई स्थलों से युगल शवाधान मिले हैं।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?
- Aकेवल 1 और 2
- Bकेवल 2 और 3
- Cकेवल 1 और 3
- D1, 2 और 3
उत्तर और व्याख्या देखें
सही उत्तर: (d) 1, 2 और 3
व्याख्या
तीनों कथन सही हैं।
- शवाधान के प्रकार: पुरातत्त्वविद् पूर्ण शवाधान (पूरा शरीर कब्र में रखा जाना), आंशिक शवाधान (शरीर को खुले में छोड़ने के बाद केवल कुछ हड्डियाँ दफ़नाना) और दाह-संस्कार के बाद शवाधान (जलाने के बाद राख या हड्डियाँ दफ़नाना) का वर्णन करते हैं।
- दिशा और कब्र की वस्तुएँ: मृतकों को सामान्यतः उत्तर–दक्षिण दिशा में, सिर उत्तर की ओर करके, रखा जाता था, प्रायः मृद्भांडों, आभूषणों और औज़ारों के साथ, जो मृत्यु के बाद के जीवन में विश्वास का संकेत देता है।
- युगल शवाधान: लोथल में ऐसी कब्रें मिली हैं जिनमें दो कंकाल एक साथ हैं।
हड़प्पा का कब्रिस्तान R-37 हड़प्पाई शवाधानों की जानकारी का प्रमुख स्रोत है। हड़प्पावासियों ने कोई बड़े मकबरे नहीं बनाए।