वॉटसन और क्रिक द्वारा प्रस्तावित DNA द्विकुंडली मॉडल में DNA की दोनों शृंखलाएँ चलती हैं:
- Aसमांतर
- Bप्रतिसमांतर
- Cवृत्ताकार
- Dलंबवत
उत्तर और व्याख्या देखें
सही उत्तर: (b) प्रतिसमांतर
व्याख्या
वॉटसन–क्रिक द्विकुंडली मॉडल (1953) में DNA की दोनों शृंखलाएँ विपरीत दिशाओं में चलती हैं। वे प्रतिसमांतर हैं: एक 5′ → 3′ और दूसरी 3′ → 5′ चलती है।
शृंखलाएँ क्षारकों के बीच हाइड्रोजन बंधों से जुड़ी रहती हैं (A, T से दो बंधों द्वारा, G, C से तीन द्वारा), और शर्करा–फ़ॉस्फ़ेट आधार-शृंखलाएँ बाहर की ओर होती हैं। प्रतिसमांतर व्यवस्था क्षारकों को सही युग्मित होने देती है, और इसी कारण केवल 5′ → 3′ कार्य करने वाला DNA पॉलीमरेज़ एक शृंखला लगातार और दूसरी टुकड़ों (ओकाज़ाकी खंडों) में बनाता है।