पंजाब के अजनाला में 2014 में एक परित्यक्त कुएँ से निकाले गए 282 कंकालों के फ़ोरेंसिक विश्लेषण ने मुख्यतः किस संयुक्त साक्ष्य से उनकी पहचान 1857 के विद्रोह के भारतीय सैनिकों के रूप में पुष्ट की?
- Aस्थानीय पंजाबी वंश का संकेत देने वाले कपाल माप और कार्बन समस्थानिक मान
- Bगंगा के मैदान के मूल का संकेत देने वाले माइटोकॉन्ड्रियल DNA हैप्लोग्रुप और स्ट्रॉन्शियम समस्थानिक अनुपात
- Cदाँतों की सड़न के प्रतिरूप और विभाजन-काल की हिंसा से कंकालीय आघात
- Dरेडियोकार्बन काल-निर्धारण और यूरोपीय शैली के हथियारों की उपस्थिति
उत्तर और व्याख्या देखें
सही उत्तर: (b) गंगा के मैदान के मूल का संकेत देने वाले माइटोकॉन्ड्रियल DNA हैप्लोग्रुप और स्ट्रॉन्शियम समस्थानिक अनुपात
व्याख्या
2014 में अमृतसर के पास अजनाला में एक पुराने कुएँ से 282 लोगों के अवशेष निकाले गए। इतिहास इन्हें 1857 में अंग्रेज़ों द्वारा मारे गए 26वीं नेटिव बंगाल इन्फ़ैंट्री के भारतीय सैनिकों से जोड़ता था। वैज्ञानिकों ने इसे दो प्रकार के साक्ष्यों से परखा:
- माइटोकॉन्ड्रियल DNA हैप्लोग्रुप, जो पंजाब के बजाय गंगा के मैदान (आज के उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल) की आबादियों से मेल खाते थे, जहाँ से बंगाल सेना की भर्ती होती थी;
- दाँतों में स्ट्रॉन्शियम समस्थानिक अनुपात, जो उस स्थान की मिट्टी और जल को दर्शाते हैं जहाँ व्यक्ति बड़ा हुआ, और जो भी गंगा के मैदान की ओर संकेत करते थे।
दोनों ने मिलकर दिखाया कि मृतक स्थानीय पंजाबी या 1947 के विभाजन के शिकार नहीं थे, बल्कि पूर्व के सैनिक थे, जैसा अभिलेख कहते थे।