ग्लूकोस उपापचय और कोशिकीय श्वसन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. TCA चक्र में सक्सिनेट का फ़्यूमरेट में रूपांतरण अनूठा है, क्योंकि यही एकमात्र चरण है जिसे आंतरिक माइटोकॉन्ड्रियल झिल्ली में धँसा एंजाइम उत्प्रेरित करता है, और यह TCA चक्र को इलेक्ट्रॉन परिवहन शृंखला से सीधे जोड़ता है।
- 2. ऑक्सीकरणी फ़ॉस्फ़ोरिलीकरण कोशिकीय श्वसन की एकमात्र अवस्था है जिसमें ऑक्सीजन सीधे खपती है, और इस अवस्था में बना सारा ATP क्रियाधार-स्तर फ़ॉस्फ़ोरिलीकरण से बनता है।
- 3. ग्लाइकोलिसिस में फ़ॉस्फ़ोफ़्रक्टोकाइनेज़-1 (PFK-1) एंजाइम ATP और साइट्रेट की उच्च सांद्रता से ऐलोस्टेरिक रूप से बाधित होता है, जिससे यह ग्लाइकोलिसिस और TCA चक्र दोनों के लिए एक प्रमुख नियामक बिंदु बनता है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?
- Aसभी कथन सही हैं
- Bकेवल कथन 1 और 3
- Cकेवल कथन 3
- Dकेवल कथन 1 और 2
उत्तर और व्याख्या देखें
सही उत्तर: (b) केवल कथन 1 और 3
व्याख्या
- कथन 1 सही है: सक्सिनेट को फ़्यूमरेट में बदलने वाला सक्सिनेट डिहाइड्रोजिनेज़ क्रेब्स चक्र का एकमात्र एंजाइम है जो आंतरिक माइटोकॉन्ड्रियल झिल्ली से बँधा है। यह इलेक्ट्रॉन परिवहन शृंखला का संकुल II भी है, अतः दोनों को जोड़ता है।
- कथन 2 गलत है: ऑक्सीकरणी फ़ॉस्फ़ोरिलीकरण में ऑक्सीजन अंतिम इलेक्ट्रॉन ग्राही के रूप में प्रयुक्त होती है, पर वहाँ बना ATP रसोपरासरण (प्रोटॉन प्रवणता से चलने वाले ATP सिंथेज़) से आता है, क्रियाधार-स्तर फ़ॉस्फ़ोरिलीकरण से नहीं। क्रियाधार-स्तर फ़ॉस्फ़ोरिलीकरण ग्लाइकोलिसिस और क्रेब्स चक्र में होता है।
- कथन 3 सही है: फ़ॉस्फ़ोफ़्रक्टोकाइनेज़-1 ग्लाइकोलिसिस का एक प्रमुख नियंत्रण बिंदु है। ATP और (क्रेब्स चक्र से आने वाले) साइट्रेट का उच्च स्तर इसे बाधित करता है, जिससे कोशिका में पर्याप्त ऊर्जा होने पर ग्लाइकोलिसिस धीमा हो जाता है।
अतः कथन 1 और 3 सही हैं।