प्रकाश-विद्युत प्रभाव में आइंस्टीन का समीकरण E = hν − φ है। निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- I. φ धातु का कार्य फलन दर्शाता है।
- II. यदि hν < φ हो, तो इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित नहीं होंगे।
- III. आपतित फ़ोटॉनों की तीव्रता बढ़ाने से उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की गतिज ऊर्जा बढ़ती है।
इनमें से कौन-से सही हैं?
- Aकेवल I और III
- Bकेवल I और II
- Cकेवल II और III
- Dसभी
उत्तर और व्याख्या देखें
सही उत्तर: (b) केवल I और II
व्याख्या
आइंस्टीन का प्रकाश-विद्युत समीकरण, Kₘₐₓ = hν − φ, बताता है कि फ़ोटॉन की ऊर्जा (hν) पहले इलेक्ट्रॉन को मुक्त करने (कार्य फलन φ) में लगती है और शेष इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा बन जाती है।
- I सही है: φ कार्य फलन है, धातु से इलेक्ट्रॉन निकालने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा।
- II सही है: यदि hν < φ हो, तो प्रकाश कितना भी तेज़ हो, कोई इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित नहीं होता। इससे एक देहली आवृत्ति तय होती है।
- III गलत है: अधिक तेज़ प्रकाश (अधिक तीव्रता) का अर्थ है अधिक फ़ोटॉन, अतः अधिक इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होते हैं, किंतु प्रत्येक इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा केवल आवृत्ति पर निर्भर करती है।