अभिकथन (A): आवेशित धात्विक गोले के भीतर विद्युत क्षेत्र शून्य होता है।
कारण (R): आवेश केवल चालक की बाहरी सतह पर रहते हैं।
सही विकल्प चुनिए:
- A(A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है
- B(A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
- C(A) सही है, किंतु (R) गलत है
- D(A) गलत है, किंतु (R) सही है
उत्तर और व्याख्या देखें
सही उत्तर (इनमें से कोई भी): (a) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है या (c) (A) सही है, किंतु (R) गलत है
व्याख्या
(A) सही है। स्थिरवैद्युत साम्यावस्था में चालक के भीतर विद्युत क्षेत्र शून्य होता है: कोई भी क्षेत्र मुक्त इलेक्ट्रॉनों को तब तक धकेलेगा जब तक वह क्षेत्र निरस्त न हो जाए।
आवेशित धातु के गोले का अतिरिक्त आवेश उसकी बाहरी सतह पर फैल जाता है। तब धातु के भीतर खींची गई कोई बंद सतह कोई आवेश नहीं घेरती, अतः गाउस के नियम से भीतर क्षेत्र शून्य है। इस अर्थ में (R) सही है और (A) की व्याख्या करता है, जिससे उत्तर (a) बनता है।
पुस्तक (c) देती है। वह (R) के शब्द "केवल" को कठोरता से पढ़ती है: यदि किसी चालक के भीतर किसी खोखले स्थान में कोई आवेश रखा जाए, तो उस खोखले स्थान की भीतरी सतह पर समान और विपरीत आवेश आ जाता है, अतः आवेश सदा केवल बाहरी सतह पर नहीं रहता।
The book's key is (c): it reads "only" in (R) strictly, since a charge placed inside a hollow conductor draws charge to the inner surface. For a charged metal sphere, (R) is true and explains (A), so (a) is also accepted.