भारत में ठगी के उन्मूलन का श्रेय किसे प्राप्त है?
- Aअर्ल ऑफ डलहौजी
- Bचार्ल्स मेटकाफ
- Cडब्ल्यू.टी. डेनिसन
- Dडब्ल्यू.एच. स्लीमैन
- Eउपर्युक्त में से कोई नहीं/उपर्युक्त में से एक से अधिक
उत्तर और व्याख्या देखें
सही उत्तर: (d) डब्ल्यू.एच. स्लीमैन
व्याख्या
ब्रिटिश सरकार मानती थी कि ठगों में हिंदू और मुसलमान दोनों धर्मों के अनुयायी थे; परंतु वास्तव में ये लोग काली, दुर्गा या भवानी की पूजा करते थे और प्रायः अपने शिकार को देवी को बलि चढ़ाने के लिए मारते थे। ठगों का विश्वास था कि उनका यह धंधा भाग्य का विधान है, और किसी की मृत्यु भी उसी प्रकार भाग्य में लिखी होती है। सती के प्रश्न पर कुछ मतभेद थे, परंतु ठगी के विषय में पूरी जनता ने सरकार का समर्थन किया। लॉर्ड विलियम बेंटिक ने ठगों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए कैप्टन विलियम हेनरी स्लीमैन को नियुक्त किया। उसने (1826 से 1835 के बीच) लगभग 1,562 ठगों को पकड़ा। कई ठगों को फांसी दी गई और शेष को आजीवन निर्वासन दिया गया। 1837 ई. के बाद संगठित ठगी का अंत हो गया।