आधुनिक इतिहास PYQ 276 / 636 · बंगाल विभाजन और स्वदेशी आंदोलन

भारत में संघर्ष के तरीकों के रूप में 'स्वदेशी' और 'बहिष्कार' पहली बार किस अवसर पर अपनाए गए?

  1. Aबंगाल विभाजन
  2. Bहोमरूल आंदोलन
  3. Cअसहयोग आंदोलन
  4. Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
  5. Eउपर्युक्त में से कोई नहीं

B.P.S.C. Teacher (9th-10th) 08.12.2023

उत्तर और व्याख्या देखें

सही उत्तर: (a) बंगाल विभाजन

व्याख्या

भारत के वायसराय लॉर्ड कर्जन ने 19 जुलाई, 1905 (कुछ स्रोतों में 20 जुलाई, 1905) को बंगाल विभाजन की घोषणा की। इस घोषणा के विरोध में कलकत्ता के टाउन हॉल में एक ऐतिहासिक बैठक हुई, जिसमें स्वदेशी आंदोलन की औपचारिक घोषणा की गई। अक्टूबर, 1905 में जब बंगाल विभाजन लागू हुआ, तो उस दिन को 'शोक दिवस' के रूप में मनाया गया। रवींद्रनाथ टैगोर के सुझाव पर इसे 'राखी दिवस' के रूप में भी मनाया गया। राष्ट्रवादियों ने बंगाल की अटूट एकता दिखाने के लिए यह दिन मनाया। टैगोर के शांतिनिकेतन की तर्ज पर बंगाल नेशनल कॉलेज की स्थापना हुई। बहुत जल्दी देश भर में कई राष्ट्रीय विद्यालय स्थापित हो गए। मार्च, 1906 में राष्ट्रीय शिक्षा परिषद का गठन हुआ। स्वदेशी आंदोलन ने आत्मनिर्भरता और आत्मशक्ति का नारा दिया। स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता का प्रश्न राष्ट्रीय स्वाभिमान, सम्मान और आत्मविश्वास से जुड़ा था। कांग्रेस ने भी अपने कलकत्ता अधिवेशन (1906) में स्वदेशी आंदोलन, बहिष्कार आंदोलन, राष्ट्रीय शिक्षा और स्वशासन से जुड़े चार प्रस्ताव पारित किए। इस प्रकार स्पष्ट है कि बंगाल विभाजन के विरोध में राष्ट्रवादियों ने स्वदेशी, बहिष्कार, राष्ट्रीय शिक्षा और स्वशासन जैसे आंदोलन चलाए।

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