'स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा', किसने कहा था?
- Aबिपिन चंद्र पाल
- Bअरविंद घोष
- Cबाल गंगाधर तिलक
- Dसुभाष चंद्र बोस
- Eउपर्युक्त में से कोई नहीं/उपर्युक्त में से एक से अधिक
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सही उत्तर: (c) बाल गंगाधर तिलक
व्याख्या
बाल गंगाधर तिलक से जुड़े नारे 'स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा' को तिलक ने पहली बार कब कहा, इस पर विद्वानों में काफी मतभेद है। वास्तव में इस नारे का विचार 1890 के दशक में आकार लेने लगा था। विद्वानों का मानना है कि तिलक के निकट सहयोगी जोसेफ 'काका' बैप्टिस्टा ने सबसे पहले यह वाक्य गढ़ा। माना जाता है कि बैप्टिस्टा ने संभवतः मराठी में यह पंक्ति रची, 'स्वराज्य हा माझा जन्मसिद्ध हक्क आहे, आणि तो मी मिळवणारच', और तिलक ने इसे अपनाकर जन-जन तक पहुंचाया। उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर कहा जा सकता है कि तिलक ने अप्रैल-मई, 1916 में होमरूल आंदोलन के दौरान सार्वजनिक मंचों से इस नारे का प्रयोग किया। कुछ स्रोत कहते हैं कि तिलक ने 1916 के कांग्रेस के लखनऊ अधिवेशन में इस नारे का प्रयोग किया, परंतु इसके समर्थन में पर्याप्त ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।