निम्नलिखित में से किन विषयों पर संविधान संशोधन केवल कम से कम आधे राज्यों के विधानमंडलों के अनुसमर्थन से ही संभव है?
- 1. राष्ट्रपति का निर्वाचन।
- 2. संसद में राज्यों का प्रतिनिधित्व।
- 3. सातवीं अनुसूची की कोई भी सूची।
- 4. किसी राज्य की विधान परिषद का उत्सादन।
सही उत्तर चुनिए।
- A2, 3 और 4
- B1, 2 और 4
- C1, 3 और 4
- D1, 2 और 3
उत्तर और व्याख्या देखें
सही उत्तर: (d) 1, 2 और 3
व्याख्या
भारतीय संविधान लचीला और गतिशील है। आवश्यकता के अनुसार इसमें संविधान के अनुच्छेद 368 में दी गई प्रक्रिया के अनुसार संशोधन किया जा सकता है। भारतीय संविधान में तीन प्रकार से संशोधन किए जा सकते हैं—
1. साधारण बहुमत द्वारा—संविधान में कुछ प्रावधान ऐसे हैं, जिन्हें संसद साधारण बहुमत से संशोधित कर सकती है। ऐसे संशोधनों को अनुच्छेद 368 के प्रयोजनों के लिए “संविधान का संशोधन” नहीं माना जाता। उदाहरण के लिए—राज्यों के नाम और सीमाएं बदलना या नए राज्य बनाना; राज्यों में विधान परिषदों का सृजन या उत्सादन; राष्ट्रपति, राज्यपालों तथा सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों के वेतन बढ़ाना आदि। ये साधारण बहुमत से किए जाते हैं।
2. विशेष बहुमत द्वारा—अनुच्छेद 368(2) की प्रक्रिया के अंतर्गत संसद प्रत्येक सदन में विशेष बहुमत (अर्थात सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत और उपस्थित तथा मत देने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत) से विधेयक पारित करके संविधान के अधिकांश अनुच्छेदों में संशोधन कर सकती है।
3. विशेष बहुमत और राज्यों के अनुसमर्थन द्वारा—
अनुच्छेद 368(2) के परंतुक के अनुसार संविधान के कुछ प्रावधान ऐसे हैं, जिनके लिए संसद के विशेष बहुमत के साथ कम से कम आधे राज्यों के विधानमंडलों का अनुमोदन आवश्यक है। उदाहरण के लिए—राष्ट्रपति का निर्वाचन और उसकी प्रक्रिया; संघ और राज्यों की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार; सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों से संबंधित प्रावधान; संसद में राज्यों का प्रतिनिधित्व; संविधान में संशोधन की संसद की शक्ति और प्रक्रिया; संघ और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का विभाजन और सातवीं अनुसूची की सूचियों की प्रविष्टियां; वस्तु एवं सेवा कर (GST) परिषद (अनुच्छेद 279क) से संबंधित प्रावधान आदि।