आधुनिक इतिहास PYQ 153 / 636 · सामाजिक एवं धार्मिक आंदोलन

उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में 'नव हिंदूवाद' के सर्वश्रेष्ठ प्रतिनिधि थे:

  1. Aरामकृष्ण परमहंस
  2. Bस्वामी विवेकानंद
  3. Cबंकिम चंद्र चटर्जी
  4. Dराजा राममोहन राय

41st B.P.S.C. (Pre) 1996

उत्तर और व्याख्या देखें

सही उत्तर: (b) स्वामी विवेकानंद

व्याख्या

स्वामी विवेकानंद ने 1 मई, 1897 को अपने गुरु की स्मृति में रामकृष्ण मिशन की स्थापना की। संन्यास लेने के बाद उन्होंने धर्मग्रंथों का गहन अध्ययन किया। अपने गुरु की शिक्षाओं की व्याख्या को व्यावहारिक रूप देने का श्रेय स्वामी विवेकानंद (1863-1902) को है; उन्होंने इन शिक्षाओं को सरल भाषा में समझाया। स्वामी विवेकानंद इस नव हिंदूवाद के प्रचारक के रूप में उभरे। 1893 ई. में वे शिकागो गए, जहां उन्होंने 'विश्व धर्म संसद' में अपना प्रसिद्ध भाषण दिया। इस भाषण से पहली बार उन्होंने पश्चिमी जगत के सामने भारतीय संस्कृति का महत्व बहुत प्रभावी ढंग से रखा। इसके बाद उन्होंने अमेरिका और इंग्लैंड की यात्रा कर हिंदू धर्म का प्रचार किया। स्वामी जी ने हिंदू धर्म की 'मुझे मत छुओ' वाली प्रवृत्ति की कड़ी निंदा की; उनके अनुसार हिंदू धर्म अब केवल खान-पान तक सीमित रह गया था। धनी वर्ग द्वारा गरीबों के शोषण पर धर्म की चुप्पी से वे बहुत दुखी थे; उनके अनुसार भूखे व्यक्ति से धर्म की बात करना ईश्वर और मानवता का अपमान है। विवेकानंद ने कोई राजनीतिक संदेश नहीं दिया, फिर भी अपने लेखों और भाषणों से उन्होंने नई पीढ़ी में अपने अतीत के प्रति नए आत्मगौरव की भावना जगाई। वे सच्चे देशभक्त थे। सुभाष चंद्र बोस ने उनके बारे में कहा: 'जहां तक बंगाल का संबंध है, हम विवेकानंद को आधुनिक राष्ट्रीय आंदोलन का आध्यात्मिक पिता कह सकते हैं।'

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